Sunday, 25 March 2012

एक थी फुलकुमारी

  एक थी फुलकुमारी...मां थी मेरी...अब नही है लेकिन मां तो मेरी अब भी वही है और जितनी बार मेरा जन्‍म होगा वही होगी...शायद इसीलिए तो मां हमसे पहले चली गई क्‍योंकि उन्‍हें भी हर जन्‍म में हमारी मां जो बनना था। मां का मस्‍त-मौला स्‍वभाव हमारे बीच नही है लेकिन वो तस्‍वीरें आंखों में कमल के फूल की भांति लगातार तैर रही है बिना रूके। पहले के जमाने में यादें आंखों में बसती थी पर अब तस्‍वीरें-विडियों आदि उन्‍हें हमसे दूर होने के अहसास को पल भर के लिए भूला देते हैं।
     इस ब्‍लॉग के जरिए माई की बातों को, यादों को सबसे साझा करूंगी। मां के बहाने अपने आपको अपनी बातों को एक नाम दूंगी, प्रत्‍येक बार एक नया नाम, नया शीर्षक। साहित्‍य, कहानी, फिल्‍म, टी.वी, लेख, बात-विचार दुनिया जहान की ढेर सारी बातें। मां मुझमे है और हमेशा रहेगी जीवित...मैं कुछ घंटो को छोड़ दूं तो बाकी सारे घंटे मां साथ-साथ रहती है। 12 अप्रैल को 4 महीने हो जायेंगे इस दुनिया से मां को गये हुए लेकिन यादें जिस तरह सशरीर मेरे दिलो-दिमाग में मौजूद है मुझे नही लगता वो कभी मुझसे दूर जा पायेंगी। इसलिए अब चलूंगी-बढूंगी लेकिन साथ-साथ मां को लेकर...
  यह ब्‍लॉग मेरी ओर से माई के लिए भावभीनी श्रद्धांजलि