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                               मां का आंचल छोटी थी  रोती थी  बिसुरती थी मां के आंचल  आंसू पोंछते डरती-भयभीत होती  मां के आंचल में छुप जाती  मां के आंचल ने सबकी नजरों से बचाया शादी हुई  बच्‍चे हुए  मां के आंचल से  बेशुमार  आशीर्वाद के फूल झड़े  मेरी झोली में  अब दूर है  मां का आंचल  बहुत दूर  आसमान में फैला है  मां का इंद्रधनुषी आंचल                                    - सविता सिंह

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Soul Talk : TRISHANT SINGH : One Crazy Giveaway #OneCrazyGiveaway

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Suno Kahani : Ek Bund

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प्रश्‍नोत्‍तर

1.  वायु में 21 % आक्‍सीजन की मात्रा होती है. 2.  अर्हिनियस ने ग्रीन हाउस गैस शब्‍द की खोज की थी. 3.  डॅाबसन ओजोन परत की मोटाई नापने वाली इकार्इ है. 4.  भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने भारतीय मिटटी को 8 भागों में बांटा है. 5.  जलोढ़ मिटटी का सबसे ज्‍यादा विस्‍तार भारतीय भू-भाग पर है. 6.  काली मिटटी कपासी मिटटी के नाम से भी जानी जाती है. 7.  लाल मिटटी का विस्‍तार सबसे ज्‍यादा तमिलनाडु राज्‍य में है. 8  निक्षालन की प्रक्रिया से लैटेराइट मिटटी का निर्माण होता है. 9. चाय की खेती सर्वाधिक पर्वतीय मिटटी में होती है. 10.  सुंदरी वृक्ष डेल्‍टाई मिटटी में होती है. 11.  नमकीन या क्षारीय मिटटी को बिहार में ऊसर या रेह कहा जाता है. 12.  7 से कम पी.एच मान वाली मिटटी को  अम्‍लीय मिटटी कहा जाता है. 13.  मृदा के सतह अपरदन को रे्रगती हुई मृत्‍यु कहते हैं. 14.  भारत में सबसे त्ज्‍यादा चावल की खेती होती है. ।5.  हरित क्रांति का सर्वाधिक प्रभाव गेहूं के उत्‍पादन पर पड़ा है. 16.  बिहार में शीतकालीन चावल की खेती को ...

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मेरी लघुकथाओं का संग्रह ई-बुक के रूप में...मातृभारती.कॉम ( matrubharti.com ) से......मोबाइल में डाउनलोड कर पढ़ा जा सकता है... http://matrubharti.com/book/2841/
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                                                            घर-आंगन की उपयोगी बातें
                                    संकल्‍प की शक्ति             एक बार एक गुरु अपने कुछ शिष्‍यों के साथ भ्रमण पर निकले. चलते-चलते रास्‍ते में उन्‍हें एक चट्टान दिखाई पड़ी. एक शिष्‍य ने कहा,' मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि इस चट्टान से बड़ा इस संसार में कुछ और नही हैं.'      तब दूसरे शिष्‍य ने कहा,' पर मुझे ऐसा लगता है कि लोहा इस चट्टान से ज्‍यादा बड़ा है क्‍योंकि वह इसे काटने की शक्ति रखता है.'      तीसरे शिष्‍य ने कहने में देर नही की ,' मित्रों, अग्नि तो लोहे से भी बड़ी हुई ना क्‍योंकि वह तो इसे गला देती है.'      चौथा शिष्‍य भला कहां चुप रहने वाला था उसने तपाक से कहा,' पर अग्नि भी कहां सबसे बड़ी है, पानी तो उसका अ‍स्‍तित्‍व ही मिटा देती है तो सबसे बड़ी तो पानी हुई ना.'       पांचवां शिष्‍य भी बोल ही पड़ा,' पानी से बड़ी तो हवा हुई ना वह तो उसे सुखा देती है.'          सभी शिष्‍य ...

एक थी फुलकुमारी

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  एक थी फुलकुमारी...मां थी मेरी...अब नही है लेकिन मां तो मेरी अब भी वही है और जितनी बार मेरा जन्‍म होगा वही होगी...शायद इसीलिए तो मां हमसे पहले चली गई क्‍योंकि उन्‍हें भी हर जन्‍म में हमारी मां जो बनना था। मां का मस्‍त-मौला स्‍वभाव हमारे बीच नही है लेकिन वो तस्‍वीरें आंखों में कमल के फूल की भांति लगातार तैर रही है बिना रूके। पहले के जमाने में यादें आंखों में बसती थी पर अब तस्‍वीरें-विडियों आदि उन्‍हें हमसे दूर होने के अहसास को पल भर के लिए भूला देते हैं।      इस ब्‍लॉग के जरिए माई की बातों को, यादों को सबसे साझा करूंगी। मां के बहाने अपने आपको अपनी बातों को एक नाम दूंगी, प्रत्‍येक बार एक नया नाम, नया शीर्षक। साहित्‍य, कहानी, फिल्‍म, टी.वी, लेख, बात-विचार दुनिया जहान की ढेर सारी बातें। मां मुझमे है और हमेशा रहेगी जीवित...मैं कुछ घंटो को छोड़ दूं तो बाकी सारे घंटे मां साथ-साथ रहती है। 12 अप्रैल को 4 महीने हो जायेंगे इस दुनिया से मां को गये हुए लेकिन यादें जिस तरह सशरीर मेरे दिलो-दिमाग में मौजूद है मुझे नही लगता वो कभी मुझसे दूर जा पायेंगी। इसलिए अब चलूंगी-बढूंगी लेकिन...