Popular posts from this blog
मां का आंचल छोटी थी रोती थी बिसुरती थी मां के आंचल आंसू पोंछते डरती-भयभीत होती मां के आंचल में छुप जाती मां के आंचल ने सबकी नजरों से बचाया शादी हुई बच्चे हुए मां के आंचल से बेशुमार आशीर्वाद के फूल झड़े मेरी झोली में अब दूर है मां का आंचल बहुत दूर आसमान में फैला है मां का इंद्रधनुषी आंचल - सविता सिंह
संकल्प की शक्ति एक बार एक गुरु अपने कुछ शिष्यों के साथ भ्रमण पर निकले. चलते-चलते रास्ते में उन्हें एक चट्टान दिखाई पड़ी. एक शिष्य ने कहा,' मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि इस चट्टान से बड़ा इस संसार में कुछ और नही हैं.' तब दूसरे शिष्य ने कहा,' पर मुझे ऐसा लगता है कि लोहा इस चट्टान से ज्यादा बड़ा है क्योंकि वह इसे काटने की शक्ति रखता है.' तीसरे शिष्य ने कहने में देर नही की ,' मित्रों, अग्नि तो लोहे से भी बड़ी हुई ना क्योंकि वह तो इसे गला देती है.' चौथा शिष्य भला कहां चुप रहने वाला था उसने तपाक से कहा,' पर अग्नि भी कहां सबसे बड़ी है, पानी तो उसका अस्तित्व ही मिटा देती है तो सबसे बड़ी तो पानी हुई ना.' पांचवां शिष्य भी बोल ही पड़ा,' पानी से बड़ी तो हवा हुई ना वह तो उसे सुखा देती है.' सभी शिष्य ...

Comments
Post a Comment